नालासोपारा (पालघर): जहां एक तरफ एक नराधम ने अपनी सनक और बदले के लिए एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसे 12 दिनों तक कालकोठरी में रखा, वहीं दूसरी तरफ खाकी वर्दी में छिपी एक ‘बड़ी बहन’ ने अपनी जान और जेब की परवाह किए बिना उस मासूम को नई जिंदगी दी। यह कहानी है नालासोपारा पुलिस की API ज़रीना बागवान की, जिन्होंने न केवल कानून का मान रखा बल्कि इंसानियत की नई मिसाल पेश की।

क्या है पूरा मामला?

मामला बदले की आग से जुड़ा है। सोनू इंगले नाम के एक युवक ने पीड़िता की बड़ी बहन के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था। जब बहन ने इनकार कर दिया और दूसरी जगह सगाई कर ली, तो सोनू ने बदला लेने के लिए उसकी छोटी बहन (अनुष्का – बदला हुआ नाम) को निशाना बनाया।

  • धोखे से अपहरण: सोनू ने अनुष्का को रास्ते में रोका और झूठ बोला कि “तुम्हारी बहन मेरे पास है।” इसी बहाने उसने चाकू की नोक पर उसे जबरन गाड़ी में बिठाया और फरार हो गया।
  • 12 दिनों का टॉर्चर: पीड़िता ने बताया कि उसे नशीला पदार्थ देकर बेहोश रखा जाता था। आरोपी ने उसके गले में लाल ताबीज बांध दिया था और चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी दी थी।

मसीहा बनकर आईं API ज़रीना बागवान

जब पीड़ित परिवार अपनी बेटी की तलाश में दर-दर भटक रहा था, तब नालासोपारा पुलिस स्टेशन की API ज़रीना बागवान और उनकी टीम ने मोर्चा संभाला। मैडम का काम सिर्फ ड्यूटी तक सीमित नहीं था:

  1. उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर आरोपी के हर ठिकाने पर दबिश दी।
  2. पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। जांच के दौरान आने-जाने और खाने-पीने का पूरा खर्च ज़रीना मैडम ने अपनी जेब से वहन किया।
  3. लड़की को छुड़ाने के बाद उसे मानसिक सदमे से बाहर निकालने के लिए मैडम ने एक बड़ी बहन की तरह उसका साथ दिया।

ईमानदार अफसर को बदनाम करने की साजिश

एक तरफ ज़रीना मैडम ने मासूम की जान बचाई, तो दूसरी तरफ अपराधी के रिश्तेदारों ने नया खेल शुरू कर दिया। जांच को भटकाने और पुलिस पर दबाव बनाने के लिए सोशल मीडिया पर मैडम के खिलाफ झूठी खबरें और फर्जी वीडियो फैलाए जा रहे हैं।

“अगर ज़रीना मैडम न होतीं, तो आज मेरी बेटी जिंदा नहीं होती। जो लोग मैडम को बदनाम कर रहे हैं, वे असल में अपराधी का साथ दे रहे हैं,” यह कहना है पीड़िता के माता-पिता का।

आज अनुष्का सुरक्षित है और आरोपी सलाखों के पीछे है। लेकिन, ज़रीना बागवान जैसी जांबाज अधिकारी की छवि खराब करने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।